क्या सोचूँ?

Sunday, October 11, 2009

सोंच

१.
हमें मिलती नहीं है आहें ज़माने की,
शायद आँखें बोझल सी हो चली हैं।
२.
मुकदर से शिकवा तो कभी हमने भी किया था,
वो बात और है, उसने हमें सुन कर भी अनसुना किया था।

३.
तुम्हें सब से ऊपर इस लिए तो नहीं बिठाया था,
कि तू भी बाकियों कि तरह धुप के चश्मे से मेरी रौशनी को हल्का कर दे?

४.
आ देख दिल कि जगह पर कुछ टुकड़े दिखेंगे,
और तेरी जगह पर अँधेरा।

Saturday, August 15, 2009

ET TU BRUTE!!!

जाग के देखो ज़रा,
अंत हुआ कैसे मेरा,
खड़ा स्तब्ध,
आँखें भरी,
फूटे शब्द,
साँसे रुकी,
देख देख,
मैं रो भी न सका,
तेरे, हाँ तेरे भी,
खंजर में,
लहू था मेरा लगा।

मैं तड़पता दर्द से,
चिंगारियों सी थी फिज़ा,
हाँथ जाते घाव पे,
चोट जो तुने दिया,
मर कर भी न मरा मैं,
ऐसा कष्ट क्यूँ मुझको दिया,
चाह थी गर जिस्म की,
तो दिल में क्यूँ ,
छेद किया।

आ देख मरता हूँ मैं,
फ़िर भी तेरा नाम ले,
अंत की साँसे भरूं,
वापिस आ के मुझको,
थाम ले।

न प्यार,
न घृणा,
न इन्साफ की मांग करूँ,
बस प्यार माँगा था,
उस प्यार की गुहार करूँ।

Sunday, August 2, 2009

QUIT SMOKING!!!

ये सिग्रेट मनचला मेरी होठों से जा लगा,
और फेफड़ों ने कहा "मैं चला, मैं चला!"।

इक कश जो लेता मैं,
दुनिया को भूल जाता मैं,
हँसने के लिए,
मौत को गले लगाया,
और सबने कहा "तू चला, तू चला!"।

उफ़ वो जवानी कर जोश,
कहाँ रहता था तब होश,
भला मान मैंने उसे भी शरण दिया,
और उसने, सिग्रेट ने भी कहा,
"अब तू चला,
अब तू चला!"।

Saturday, August 1, 2009

आज इक सपना फ़िर देखा....

आज इक सपना फ़िर देखा था,
कुछ टूटा,
कुछ बिखरा सा,
आँखें खुली तो दिल चाहा,
थोड़ी देर और सो जाता,
नींद से द्वंद्व आज भी रही,
मैंने सोने कि गुहार की,
और उसनें,
वापिस आंखों कर साथ छोड़ दिया।

आज इक सपना फ़िर देखा था,
कुछ टूटा,
कुछ बिखरा सा।


Sunday, July 12, 2009

गुब्बारे !!!



शायर
: रात की ये बात है,
उनसे मुलाकात का इंतज़ार है.....
आयेंगे वो अभी अंधेरे से निकल के,
चाँद की चाँदनी उनके लिए बेकरार है....


श्रोता : अबे चुप, चाँद चाँदनी के लिए बेकरार होगा,
या आपके मेहबूब के लिए पगला रहा होगा,
अबे जा बे शायर कुछ और सुना,
हमें नहीं सुननी तेरी बकवास है!!!


शायर : सुनिए हमारी बात ज़रा,
न हो जाईये नाराज़,
हमारे शेर में है प्यार भरा,
गौर तो फरमाइए जनाब.....

श्रोता : चुप कर तू ज़रा,
कुछ दूसरी बात बता,
ऐसे भी प्यार ने वाट लगाया है,
अब तू भी न लगा!!!!

शायर : अच्छा तो ये मुसीबत है,
आपको किसी ने नहीं दी,
प्यार करने की इजाज़त है,
आप जैसे दिलजलों के लिए इक शेर लाया हूँ,
तालियों की गूँज का भागीदार लाया हूँ,
तो सुनिए ज़रा दिल थाम के,
ये दास्तान हैं टूटे हुए दो दिलों के.....

न मैं सलीम,
न हीं तू अनारकली,
मैंने जब से देखा तुझे,
बस ढूंढता हूँ तेरी गली,
काश तू अनारकली होती,
तो मेरी कनीज़ होती,
at least मेरी bike से petrol तो कम न होती....


श्रोता : कहीं तू Sadaam और मैं Bush होता,
तो एक पकाऊ तो इस दुनिया से और कम होता!!!!!


the public roars in laughter and so do I while attending this poetic conversation between between the poet and the listner!!! ...:D

Wednesday, July 1, 2009

यूँ हीं....

वो सूरज की तालाश में,
इस तरह रात को भटकता था,

कि जब सुबह की पहली किरण उस पर पड़ी,
वो टूट कर बिखर गया....

Tuesday, June 30, 2009

क्यूँ ढूंढता है तुम्हें ये मन् मेरा…..



इक रास्ते की चाह ने इतना मजबूर कर डाला,

की ज़िन्दगी को भूल बैठा,

होश में जब आया,

यूँ परेशान की चाहत ने तेरी मुझे,

इक इंसान को फ़कीर बना डाला,

बंदगी तो पहले भी किया करता था,

बन्दे को तुने आशिक बना डाला.

आज देख मैं मुस्कुरा रहा,

कुछ भी नही अपना कहने को,

सारी दुनिया को अपना रहा,

जो भी शक थी वफाओं में मेरी,

उन शकों को तो दूर किया,

पर इक इल्तिजा और है तुझसे,

अगर हो सके तो ये भी बता देना,

क्यूँ ढूंढता है तुम्हें ये मन् मेरा…..