शायर : रात की ये बात है,
उनसे मुलाकात का इंतज़ार है.....
आयेंगे वो अभी अंधेरे से निकल के,
चाँद की चाँदनी उनके लिए बेकरार है....
श्रोता : अबे चुप, चाँद चाँदनी के लिए बेकरार होगा,
या आपके मेहबूब के लिए पगला रहा होगा,
अबे जा बे शायर कुछ और सुना,
हमें नहीं सुननी तेरी बकवास है!!!
शायर : सुनिए हमारी बात ज़रा,
न हो जाईये नाराज़,
हमारे शेर में है प्यार भरा,
गौर तो फरमाइए जनाब.....
श्रोता : चुप कर तू ज़रा,
कुछ दूसरी बात बता,
ऐसे भी प्यार ने वाट लगाया है,
अब तू भी न लगा!!!!
शायर : अच्छा तो ये मुसीबत है,
आपको किसी ने नहीं दी,
प्यार करने की इजाज़त है,
आप जैसे दिलजलों के लिए इक शेर लाया हूँ,
तालियों की गूँज का भागीदार लाया हूँ,
तो सुनिए ज़रा दिल थाम के,
ये दास्तान हैं टूटे हुए दो दिलों के.....
न मैं सलीम,
न हीं तू अनारकली,
मैंने जब से देखा तुझे,
बस ढूंढता हूँ तेरी गली,
काश तू अनारकली होती,
तो मेरी कनीज़ होती,
at least मेरी bike से petrol तो कम न होती....
श्रोता : कहीं तू Sadaam और मैं Bush होता,
तो एक पकाऊ तो इस दुनिया से और कम होता!!!!!
the public roars in laughter and so do I while attending this poetic conversation between between the poet and the listner!!! ...:D